सूरह ता-हा (طه) (आयत 119)

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20 ता-हा(طه), आयत ११९

وَأَنَّكَ لَا تَظْمَأُ فِيهَا وَلَا تَضْحَىٰ 119 ١١٩

और यह कि न यहाँ प्यासे रहोगे और न धूप की तकलीफ़ उठाओगे।" (११९)

तफ़सीर
तथा वह तुम्हें पिलाएगा, तो तुम प्यासे नहीं होगे और तुम्हें छाया देगा, तो तुम्हें सूर्य का ताप नहीं लगेगा।

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