सूरह ता-हा (طه) (आयत 79)

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20 ता-हा(طه), आयत ७९

وَأَضَلَّ فِرْعَوْنُ قَوْمَهُ وَمَا هَدَىٰ 79 ٧٩

फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को पथभ्रष्ट किया और मार्ग न दिखाया (७९)

तफ़सीर
फ़िरऔन ने अपनी जाति के लोगों को, उनके आगे कुफ़्र (अविश्वास) को सुंदर रूप में प्रस्तुत कर और उन्हें असत्य के जाल में फाँसकर पथभ्रष्ट किया तथा उन्हें सत्य का मार्ग नहीं दिखाया।

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