सूरह अल-अंबिया (पैग़म्बर — الأنبياء) (आयत 36)

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21 अल-अंबिया(الأنبياء), आयत ३६

وَإِذَا رَآكَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا الَّذِي يَذْكُرُ آلِهَتَكُمْ وَهُمْ بِذِكْرِ الرَّحْمَٰنِ هُمْ كَافِرُونَ 36 ٣٦

जिन लोगों ने इनकार किया वे जब तुम्हें देखते है तो तुम्हारा उपहास ही करते है। (कहते है,) "क्या यही वह व्यक्ति है, जो तुम्हारे इष्ट -पूज्यों की बुराई के साथ चर्चा करता है?" और उनका अपना हाल यह है कि वे रहमान के ज़िक्र (स्मरण) से इनकार करते हैं (३६)

तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) जब ये मुश्रिक लोग आपको देखते हैं, तो आपका मज़ाक़ उड़ाने लगते हैं और अपने अनुयायियों को यह कहकर आपसे नफ़रत दिलाते हैं कि : क्या यही वह व्यक्ति है, जो तुम्हारे देवताओं को, जिनकी तुम पूजा करते हो, बुरा-भला कहता है?! वे आपका मज़ाक उड़ाने के साथ-साथ उस क़ुरआन का भी इनकार करने वाले हैं, जो अल्लाह ने उनपर अवतरित किया है तथा उन नेमतों की नाशुक्री करते हैं, जो उसने उन्हें प्रदान की हैं। इसलिए वे खुद ही दोष के सबसे अधिक योग्य हैं क्योंकि उनके अंदर हर तरह की बुराई पाई जाती है।

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