औऱ उन्हें हमने अपनी दयालुता में प्रवेश कराया। निस्संदेह वे सब अच्छे लोगों में से थे (८६)
तफ़सीर
हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। चुनाँचे हमने उन्हें नबी बनाए और उन्हें जन्नत में दाखिल किए। वे अल्लाह के उन सदाचारी बंदों में से थे, जिन्होंने अपने पालनहार की आज्ञा का पालन किया और उनके ज़ाहिर-ओ-बातिन (अंदर और बाहर) अच्छे थे।
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