सूरह अल-हज (हज (तीर्थयात्रा) — الحج) (आयत 31)

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22 अल-हज(الحج), आयत ३१

حُنَفَاءَ لِلَّهِ غَيْرَ مُشْرِكِينَ بِهِ ۚ وَمَنْ يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَاءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ أَوْ تَهْوِي بِهِ الرِّيحُ فِي مَكَانٍ سَحِيقٍ 31 ٣١

इस तरह कि अल्लाह ही की ओर के होकर रहो। उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ, क्योंकि जो कोई अल्लाह के साथ साझी ठहराता है तो मानो वह आकाश से गिर पड़ा। फिर चाहे उसे पक्षी उचक ले जाएँ या वायु उसे किसी दूरवर्ती स्थान पर फेंक दे (३१)

तफ़सीर
इन सभी चीज़ों से बचो, इस हाल में कि अल्लाह के निकट पसंदीदा धर्म के अलावा हर धर्म से अलग होने वाले हो, उसके साथ इबादत में किसी को शरीक ठहराने वाले न हो। और जिसने अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया, वह ऐसा है जैसे वह आसमान से गिर गया, अब या तो पक्षी उसके मांस और हड्डियों को उचक लेंगे, या हवा उसे कहीं दूर फेंक देगी।

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