सूरह अल-हज (हज (तीर्थयात्रा) — الحج) (आयत 35)

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22 अल-हज(الحج), आयत ३५

الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَالصَّابِرِينَ عَلَىٰ مَا أَصَابَهُمْ وَالْمُقِيمِي الصَّلَاةِ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنْفِقُونَ 35 ٣٥

ये वे लोग है कि जब अल्लाह को याद किया जाता है तो उनके दिल दहल जाते है और जो मुसीबत उनपर आती है उसपर धैर्य से काम लेते है और नमाज़ को क़ायम करते है, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते है (३५)

तफ़सीर
जिनका हाल यह है कि जब अल्लाह का नाम लिया जाता है, तो उसकी सज़ा से भयभीत होकर उसके आदेश का उल्लंघन करने से बचते हैं, और यदि उनपर कोई विपत्ति आती है तो वे धैर्य रखते हैं, तथा पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ते हैं, और अल्लाह के दिए धन से नेकी के कार्यों पर खर्च करते हैं।

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