सूरह अल-मुमिनून (विश्वासी — المؤمنون) (आयत 102)

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23 अल-मुमिनून(المؤمنون), आयत १०२

فَمَنْ ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ 102 ١٠٢

फिर जिनके पलड़े भारी हुए तॊ वही हैं जो सफल। (१०२)

तफ़सीर
फिर जिसके पलड़े, उसकी नेकियों के उसके गुनाहों से अधिक होने के कारण, भारी हो गए, तो वही लोग अपनी अपेक्षित चीज़ों को प्राप्त करके और अपनी अप्रिय चीज़ों से मुक्ति पाकर, सफल हैं।

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