सूरह अल-मुमिनून (विश्वासी — المؤمنون) (आयत 104)

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23 अल-मुमिनून(المؤمنون), आयत १०४

تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ 104 ١٠٤

आग उनके चेहरों को झुलसा देगी और उसमें उनके मुँह विकृत हो रहे होंगे (१०४)

तफ़सीर
उनके चेहरों को जहन्नम की आग जला देगी। और उसमें उनकी स्थिति यह होगी कि गंभीर रूप से त्योरी चढ़ा हुआ होने से उनके ऊपरी और निचले होंठ सिकुड़ गए होंगे और उनके दाँत बाहर निकले आए होंगे।

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