सूरह अल-मुमिनून (विश्वासी — المؤمنون) (आयत 43)

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23 अल-मुमिनून(المؤمنون), आयत ४३

مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ 43 ٤٣

कोई समुदाय न तो अपने निर्धारित समय से आगे बढ़ सकता है और न पीछे रह सकता है (४३)

तफ़सीर
इन झुठलाने वाले समुदायों में से कोई भी समुदाय अपने विनाश के आने के नियत समय से न आगे बढ़ता है, न उससे पीछे रहता है। चाहे उसके पास कितने भी संसाधन हों।

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