सूरह अल-मुमिनून (विश्वासी — المؤمنون) (आयत 62)

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23 अल-मुमिनून(المؤمنون), आयत ६२

وَلَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۖ وَلَدَيْنَا كِتَابٌ يَنْطِقُ بِالْحَقِّ ۚ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ 62 ٦٢

हम किसी व्यक्ति पर उसकी समाई (क्षमता) से बढ़कर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालते और हमारे पास एक किताब है, जो ठीक-ठीक बोलती है, और उनपर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा (६२)

तफ़सीर
हम किसी प्राणी पर केवल उतने ही कार्य का भार डालते हैं, जितना वह कर सकता है। और हमारे पास एक किताब है, जिसमें हमने हर कार्यकर्ता के काम को अंकित कर रखा है। वह सत्य के साथ बोलती है, जो संदेह से परे है। और उनपर, उनकी नेकियों को घटाकर अथवा उनके गुनाहों को बढ़ाकर कोई अत्याचार नहीं किया जाएगा।

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