सूरह अल-फुरक़ान (भेद करने वाला — الفرقان) (आयत 29)

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25 अल-फुरक़ान(الفرقان), आयत २९

لَقَدْ أَضَلَّنِي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ إِذْ جَاءَنِي ۗ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْإِنْسَانِ خَذُولًا 29 ٢٩

उसने मुझे भटकाकर अनुस्मृति से विमुख कर दिया, इसके पश्चात कि वह मेरे पास आ चुकी थी। शैतान तो समय पर मनुष्य का साथ छोड़ ही देता है।" (२९)

तफ़सीर
निश्चय इस काफ़िर मित्र ने मुझे क़ुरआन से भटका दिया, जब कि वह रसूल के माध्यम से मेरे पास पहुँच चुका था। तथा शैतान मनुष्य को हमेशा छोड़ जाने वाला है। जब उसपर कोई मुसीबत आती है, तो उससे किनारा कर लेता है।

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