सूरह अल-फुरक़ान (भेद करने वाला — الفرقان) (आयत 30)

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25 अल-फुरक़ान(الفرقان), आयत ३०

وَقَالَ الرَّسُولُ يَا رَبِّ إِنَّ قَوْمِي اتَّخَذُوا هَٰذَا الْقُرْآنَ مَهْجُورًا 30 ٣٠

रसूल कहेगा, "ऐ मेरे रब! निस्संदेह मेरी क़ौम के लोगों ने इस क़ुरआन को व्यर्थ बकवास की चीज़ ठहरा लिया था।" (३०)

तफ़सीर
तथा उस दिन रसूल अपनी जाति की हालत के बारे में शिकायत करते हुए कहेगा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी क़ौम के लोग, जिनकी ओर तूने मुझे भेजा था, इस क़ुरआन को को छोड़कर इससे दूर हो गए थे।

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