सूरह अल-फुरक़ान (भेद करने वाला — الفرقان) (आयत 43)

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25 अल-फुरक़ान(الفرقان), आयत ४३

أَرَأَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلَٰهَهُ هَوَاهُ أَفَأَنْتَ تَكُونُ عَلَيْهِ وَكِيلًا 43 ٤٣

क्या तुमने उसको भी देखा, जिसने अपना प्रभु अपनी (तुच्छ) इच्छा को बना रखा है? तो क्या तुम उसका ज़िम्मा ले सकते हो (४३)

तफ़सीर
क्या (ऐ रसूल!) आपने उस व्यक्ति को देखा, जिसने अपनी इच्छा को अपना पूज्य बना लिया और उसकी आज्ञा का पालन किया, तो क्या आप उसके संरक्षक होंगे कि उसे ईमान की ओर लौटा लें और उसे कुफ़्र से रोक दें?!

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