सूरह अल-फुरक़ान (भेद करने वाला — الفرقان) (आयत 63)

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25 अल-फुरक़ान(الفرقان), आयत ६३

وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا 63 ٦٣

रहमान के (प्रिय) बन्दें वहीं है जो धरती पर नम्रतापूर्वक चलते है और जब जाहिल उनके मुँह आएँ तो कह देते है, "तुमको सलाम!" (६३)

तफ़सीर
और 'रह़मान' (अत्यंत दयावान् अल्लाह) के मोमिन बंदे वे हैं, जो धरती पर गरिमा और नम्रता के साथ चलते हैं, तथा जब अज्ञानी (अक्खड़) लोग उन्हें संबोधित करते हैं, तो वे उन्हें बदला नहीं देते। बल्कि, वे उनसे ऐसी भली बात कहते हैं, जिसमें वे अक्खड़पन नहीं दिखाते हैं।

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