सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 102)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १०२

فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ 102 ١٠٢

क्या ही अच्छा होता कि हमें एक बार फिर पलटना होता, तो हम मोमिनों में से हो जाते!" (१०२)

तफ़सीर
काश हमें एक बार दुनिया के जीवन में लौटने का अवसर मिल जाता, तो हम अल्लाह पर ईमान रखने वालों में से हो जाते।

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