सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 121)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १२१

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ 121 ١٢١

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं (१२१)

तफ़सीर
उपर्युक्त नूह और उनके समुदाय की कहानी तथा नूह एवं उनके मोमिन साथियों के बच निकलने और उनके समुदाय के काफ़िरों के विनाश में निश्चय सीख ग्रहण करने वालों के लिए बड़ी सीख है। तथा उनमें से अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

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