सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 128)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १२८

أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ آيَةً تَعْبَثُونَ 128 ١٢٨

क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे? (१२८)

तफ़सीर
क्या तुम प्रत्येक ऊँचे स्थान पर व्यर्थ में स्मारक भवन का निर्माण करते हो, जबकि उसका इस दुनिया या आख़िरत में तुम्हें कोई फ़ायदा नहीं होता?!

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