सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 129)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १२९

وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ 129 ١٢٩

और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है? (१२९)

तफ़सीर
और तुम क़िले और महलें बनाते हो, मानो तुम इस दुनिया में हमेशा के लिए रहने वाले हो और यहाँ से तुम्हें जाना नहीं है।

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