सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 130)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १३०

وَإِذَا بَطَشْتُمْ بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ 130 ١٣٠

और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो! (१३०)

तफ़सीर
और जब तुम क़त्ल करने अथवा मारने के लिए किसी पर हमला करते हो, तो निर्दय और बे-रहम होकर हमला करते हो।

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