सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 149)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १४९

وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِهِينَ 149 ١٤٩

तुम पहाड़ों को काट-काटकर इतराते हुए घर बनाते हो? (१४९)

तफ़सीर
और तुम पर्वतों को काटकर रहने के लिए घर बनाते हो और तुम उनको तराशने में कुशल हो।

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