सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 15)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १५

قَالَ كَلَّا ۖ فَاذْهَبَا بِآيَاتِنَا ۖ إِنَّا مَعَكُمْ مُسْتَمِعُونَ 15 ١٥

कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है (१५)

तफ़सीर
अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : हरगिज़ ऐसा नहीं होगा। वे कदापि तुम्हें क़त्ल नहीं कर सकते। अतः तुम अपने भाई हारून के साथ हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, जो तुम दोनों की सत्यता की पुष्टि करने वाली हैं। क्योंकि हम अपनी सहायता एवं समर्थन के साथ तुम्हारे साथ हैं, तुम उनसे तथा वे तुमसे जो कुछ कहेंगे हम सब कुछ सुनने वाले हैं। हमसे कोई भी चीज़ छूट नहीं सकती।

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