सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 168)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १६८

قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُمْ مِنَ الْقَالِينَ 168 ١٦٨

उसने कहा, "मैं तुम्हारे कर्म से अत्यन्त विरक्त हूँ। (१६८)

तफ़सीर
लूत अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : मैं तुम्हारे इस कार्य से जिसे तुम करते हो, सख़्त नफ़रत और घृणा करने वालों में से हूँ।

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