सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 170)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १७०

فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ 170 ١٧٠

अन्ततः हमने उसे और उसके सारे लोगों को बचा लिया; (१७०)

तफ़सीर
तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली तथा उन्हें और उनके पूरे परिवार को बचा लिया।

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