सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 174)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १७४

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ 174 ١٧٤

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं (१७४)

तफ़सीर
कुकर्म के कारण लूत की जाति पर उतरने वाले उपर्युक्त अज़ाब में, सीख ग्रहण करने वालों के लिए निश्चय बड़ी सीख है। और उनमें से अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

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