सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 184)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १८४

وَاتَّقُوا الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالْجِبِلَّةَ الْأَوَّلِينَ 184 ١٨٤

उसका डर रखो जिसने तुम्हें और पिछली नस्लों को पैदा किया हैं।" (१८४)

तफ़सीर
तथा उस अस्तित्व से भय खाते हुए तक़वा धारण करो, जिसने तुमको तथा पहले के समुदायों को पैदा किया है कि कहीं वह तुमपर अपनी यातना न भेज दे।

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