सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 187)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १८७

فَأَسْقِطْ عَلَيْنَا كِسَفًا مِنَ السَّمَاءِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ 187 ١٨٧

फिर तू हमपर आकाश को कोई टुकड़ा गिरा दे, यदि तू सच्चा है।" (१८७)

तफ़सीर
यदि तू अपने दावे में सच्चा है, तो हमपर आसमान से कोई टुकड़ा गिरा दे।

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