सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 202)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत २०२

فَيَأْتِيَهُمْ بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ 202 ٢٠٢

फिर जब वह अचानक उनपर आ जाएगी और उन्हें ख़बर भी न होगी, (२०२)

तफ़सीर
सो यह यातना उनपर अचानक आ पड़े, और वे इसके आने से वाक़िफ़ न हों यहाँ तक कि यह अचानक उन्हें धर ले।

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