सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 211)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत २११

وَمَا يَنْبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ 211 ٢١١

न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है (२११)

तफ़सीर
और इसे लेकर आपके दिल पर उतरना उनके योग्य नहीं है, और न वे ऐसा कर सकते हैं।

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