सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 215)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत २१५

وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ 215 ٢١٥

और जो ईमानवाले तुम्हारे अनुयायी हो गए है, उनके लिए अपनी भुजाएँ बिछाए रखो (२१५)

तफ़सीर
तथा ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करें, उनपर दया एवं नरमी करते हुए उनके साथ विनम्रता का व्यवहार करें।

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