सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 226)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत २२६

وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ 226 ٢٢٦

और कहते वह है जो करते नहीं? - (२२६)

तफ़सीर
और यह कि वे झूठ बोलते हैं। चुनाँचे वे कहते हैं : हमने यह किया है, जबकि उन्होंने उसे नहीं किया होता है।

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