सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 33)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत ३३

وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ 33 ٣٣

और उसने अपना हाथ बाहर खींचा तो फिर क्या देखते है कि वह देखनेवालों के सामने चमक रहा है (३३)

तफ़सीर
और उन्होंने अपना हाथ अपने गिरेबान में डाला, जबकि वह सफेद नहीं था, फिर उसे इस हालत में निकाला कि वह सफ़ेद और चमकदार था, पर बरस की सफ़ेदी की तरह नहीं, देखने वाले उसे ऐसा ही देख रहे थे।

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