सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 51)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत ५१

إِنَّا نَطْمَعُ أَنْ يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَنْ كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ 51 ٥١

हमें तो इसी की लालसा है कि हमारा रब हमारी ख़ताओं को क्षमा कर दें, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाए।" (५१)

तफ़सीर
हम आशा करते हैं कि अल्लाह हमारे उन पिछले पापों को मिटा देगा जो हमने किए थे क्योंकि हम मूसा पर सबसे पहले ईमान लाने वाले और उनको सच्चा मानने वाले बने हैं।

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