सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 54)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत ५४

إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ 54 ٥٤

कि "यह गिरे-पड़े थोड़े लोगों का एक गिरोह है, (५४)

तफ़सीर
फ़िरऔन ने बनी इसराईल के महत्व को घटाने के लिए कहा : निःसंदेह ये लोग तो एक छोटा-सा समूह हैं।

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