सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 87)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत ८७

وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ 87 ٨٧

और मुझे उस दिन रुसवा न कर, जब लोग जीवित करके उठाए जाएँगे। (८७)

तफ़सीर
और मुझे उस दिन यातना देकर रुसवा न करना, जिस दिन लोग हिसाब के लिए पुनः जीवित किए जाएँगे।

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