सूरह अन-नमल (चींटी — النمل) (आयत 31)

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27 अन-नमल(النمل), आयत ३१

أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ 31 ٣١

यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और आज्ञाकारी बनकर मेरे पास आओ।" (३१)

तफ़सीर
यह कि तुम अभिमान न करो तथा अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसके साथ शिर्क को परित्याग करने के मेरे आह्वान को स्वीकार करते हुए, आज्ञाकारी बनकर, मेरे पास आ जाओ। क्योंकि तुमने अल्लाह के साथ सूर्य की पूजा की है।

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