सूरह अन-नमल (चींटी — النمل) (आयत 84)

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27 अन-नमल(النمل), आयत ८४

حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُمْ بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ 84 ٨٤

यहाँ तक कि जब वे आ जाएँगे तो वह कहेगा, "क्या तुमने मेरी आयतों को झुठलाया, हालाँकि अपने ज्ञान से तुम उनपर हावी न थे या फिर तुम क्या करते थे?" (८४)

तफ़सीर
उनको हाँका जाता रहेगा, यहाँ तक कि जब वे अपने हिसाब-किताब के स्थान पर पहुँच जाएँगे, तो अल्लाह उनको फटकारते हुए कहेगा : क्या तुमने मेरी उन आयतों को झुठलाया था जो मेरे एकेश्वरवाद को दर्शाने वाली थीं और मेरी शरीयत को सम्मिलित थीं, जबकि तुम्हें उनके असत्य होने का पूर्ण ज्ञान नहीं था कि तुम्हारे लिए उनका झुठलाना उचित होता! या तुमने उनके साथ कौन-सा रवैया अपनाया था, पुष्टि करने का या झुठलाने का?!

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