सूरह अल-क़सस (कहानियाँ — القصص) (आयत 66)

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28 अल-क़सस(القصص), आयत ६६

فَعَمِيَتْ عَلَيْهِمُ الْأَنْبَاءُ يَوْمَئِذٍ فَهُمْ لَا يَتَسَاءَلُونَ 66 ٦٦

उस दिन उन्हें बात न सूझेंगी, फिर वे आपस में भी पूछताछ न करेंगे (६६)

तफ़सीर
तो उनसे तर्क लुप्त हो जाएगा और वे कुछ भी जवाब नहीं देंगे, और न ही यह हो सकेगा कि एक-दूसरे से पूछ लें; क्योंकि वे यातना से ग्रस्त होने का यक़ीन हो जाने के कारण गंभीर सदमें में होंगे।

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