सूरह अल-अनकबूत (मकड़ी — العنكبوت) (आयत 4)

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29 अल-अनकबूत(العنكبوت), आयत ४

أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ أَنْ يَسْبِقُونَا ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ 4 ٤

या उन लोगों ने, जो बुरे कर्म करते है, यह समझ रखा है कि वे हमारे क़ाबू से बाहर निकल जाएँगे? बहुत बुरा है जो फ़ैसला वे कर रहे है (४)

तफ़सीर
बल्कि, क्या उन लोगों ने जो शिर्क और अन्य पाप करते हैं, यह समझ रखा है कि वे हमें विवश कर देंगे और हमारी सज़ा से बच जाएँगे? बहुत ही बुरा है वह फ़ैसला, जो वे कर रहे हैं। क्योंकि वे अल्लाह को विवश नहीं कर सकते और और यदि वे अपने कुफ़्र ही की हालत पर मर गए, तो वे उसकी सज़ा से नहीं बच सकते।

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