सूरह आल-इमरान (इमरान का परिवार — آل عمران) (आयत 101)

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3 आल-इमरान(آل عمران), आयत १०१

وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَأَنْتُمْ تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ آيَاتُ اللَّهِ وَفِيكُمْ رَسُولُهُ ۗ وَمَنْ يَعْتَصِمْ بِاللَّهِ فَقَدْ هُدِيَ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ 101 ١٠١

अब तुम इनकार कैसे कर सकते हो, जबकि तुम्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाई जा रही है और उसका रसूल तुम्हारे बीच मौजूद है? जो कोई अल्लाह को मज़बूती से पकड़ ले, वह सीधे मार्ग पर आ गया (१०१)

तफ़सीर
तुम ईमान लाने के बाद अल्लाह का इनकार कैसे करोगे, जबकि तुम्हारे पास ईमान (विश्वास) पर दृढ़ता का सबसे बड़ा कारण मौजूद है! चुनाँचे तुम्हारे सामने अल्लाह की आयतें पढ़ी जाती हैं और स्वयं अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हारे लिए उनका स्पष्टीकरण करते हैं। और जो व्यक्ति अल्लाह की पुस्तक तथा उसके रसूल की सुन्नत को थाम ले, तो वास्तव में अल्लाह ने उसे सीधे रास्ते की तौफीक़ प्रदान कर दी जिसमें कोई टेढ़ापन (कुटिलता) नहीं है।

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