सूरह आल-इमरान (इमरान का परिवार — آل عمران) (आयत 105)

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3 आल-इमरान(آل عمران), आयत १०५

وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ تَفَرَّقُوا وَاخْتَلَفُوا مِنْ بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُ ۚ وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ 105 ١٠٥

तुम उन लोगों की तरह न हो जाना जो विभेद में पड़ गए, और इसके पश्चात कि उनके पास खुली निशानियाँ आ चुकी थी, वे विभेद में पड़ गए। ये वही लोग है, जिनके लिए बड़ी (घोर) यातना है। (यह यातना उस दिन होगी) (१०५)

तफ़सीर
(ऐ ईमान वालो) तुम उन किताब वालों की तरह न हो जाओ, जो विभेद करके गिरोहों तथा दलों में बट गए। उन्होंने अल्लाह की ओर से उनके पास स्पष्ट निशानियाँ आ जाने के बाद अपने धर्म के बारे में मतभेद किया। और इन उक्त लोगों के लिए अल्लाह की ओर से बड़ी यातना है।

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