सूरह आल-इमरान (इमरान का परिवार — آل عمران) (आयत 126)

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3 आल-इमरान(آل عمران), आयत १२६

وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ لَكُمْ وَلِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُمْ بِهِ ۗ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ 126 ١٢٦

अल्लाह ने तो इसे तुम्हारे लिए बस एक शुभ-सूचना बनाया और इसलिए कि तुम्हारे दिल सन्तुष्ट हो जाएँ - सहायता तो बस अल्लाह ही के यहाँ से आती है जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है (१२६)

तफ़सीर
और अल्लाह ने फरिश्तों के द्वारा इस सहायता और इस आपूर्ति को केवल तुम्हारे लिए एक शुभ सूचना बनाया है, जिससे तुम्हारे दिलों को आश्वासन हो जाए। अन्यथा, वास्तव में सहायता मात्र इन ज़ाहिरी कारणों से नहीं होती, बल्कि वास्तविक सहायता उस प्रभुत्वशाली अल्लाह की ओर से आती है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, और जो अपने आकलन व अनुमान और अपने विधान में हिकमत वाला (तत्वदर्शी) है।

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