सूरह अर-रूम (रोमवासी — الروم) (आयत 22)

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30 अर-रूम(الروم), आयत २२

وَمِنْ آيَاتِهِ خَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافُ أَلْسِنَتِكُمْ وَأَلْوَانِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِلْعَالِمِينَ 22 ٢٢

और उसकी निशानियों में से आकाशों और धरती का सृजन और तुम्हारी भाषाओं और तुम्हारे रंगों की विविधता भी है। निस्संदेह इसमें ज्ञानवानों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है (२२)

तफ़सीर
उसकी शक्ति और एकता को दर्शाने वाली उसकी महान निशानियों में से : आकाशों का निर्माण तथा पृथ्वी का निर्माण है। तथा उन्हीं में से तुम्हारी भाषाओं की विविधता और तुम्हारे रंगों का अलग-अलग होना है। निश्चय यह जो कुछ उल्लेख हुआ है, उसमें ज्ञान और अंतर्दृष्टि रखने वाले लोगों के लिए प्रमाण और संकेत हैं।

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