सूरह सबा़ (سبأ) (आयत 23)

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34 सबा़(سبأ), आयत २३

وَلَا تَنْفَعُ الشَّفَاعَةُ عِنْدَهُ إِلَّا لِمَنْ أَذِنَ لَهُ ۚ حَتَّىٰ إِذَا فُزِّعَ عَنْ قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ ۖ قَالُوا الْحَقَّ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ 23 ٢٣

और उसके यहाँ कोई सिफ़ारिश काम नहीं आएगी, किन्तु उसी की जिसे उसने (सिफ़ारिश करने की) अनुमति दी हो। यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर हो जाएगी, तो वे कहेंगे, "तुम्हारे रब ने क्या कहा?" वे कहेंगे, "सर्वथा सत्य। और वह अत्यन्त उच्च, महान है।" (२३)

तफ़सीर
और महिमावान अल्लाह के पास सिफारिश केवल उस व्यक्ति के लिए लाभदायक होगी, जिसे अल्लाह सिफारिश की अनुमति प्रदान कर दे। और अल्लाह अपनी महानता के कारण, केवल उसी को सिफारिश की अनुमति देगा, जिसे वह पसंद करे। और उसकी महानता का एक दृश्य यह है कि जब वह आकाश में बात करता है, तो फ़रिश्ते उसके फरमान के आगे विनम्रता अपनाते हुए अपने परों को फड़फड़ाने लगते हैं। यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर कर दी जाती है, तो फ़रिश्ते जिबरील से पूछते हैं : तुम्हारे पालनहार ने क्या कहा? जबरील कहते हैं : उसने सत्य कहा है और वह अपने अस्तित्व और प्रभुता में सबसे ऊँचा, और बहुत महान है जिसके सामने हर चीज़ हीन (छोटी) है।

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