सूरह या-सिन (يس) (आयत 25)

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36 या-सिन(يس), आयत २५

إِنِّي آمَنْتُ بِرَبِّكُمْ فَاسْمَعُونِ 25 ٢٥

"मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले आया, अतः मेरी सुनो!" (२५)

तफ़सीर
निःसंदेह (ऐ मेरी जाति के लोगो) मैं अपने तथा तुम्हारे पालनहार पर ईमान ले आया। अतः मेरी बात सुनो। मुझे उस क़त्ल की परवाह नहीं है, जिसकी तुम मुझे धमकी दे रहे हो। फिर क्या था, उसकी जाति ने उसे मार डाला। तो अल्लाह ने उसे जन्नत में दाखिल कर दिया।

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