अल्लाह के बन्दों की बात और है, जिनको उसने चुन लिया है (१२८)
तफ़सीर
परंतु उनकी जाति में से जो व्यक्ति मोमिन और अल्लाह की इबादत में इख़्लास (निष्ठा) से काम लेने वाला है; तो वह यातना में उपस्थित किए जाने से मुक्ति पाने वाला है।
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