सूरह अस-साफ़्फ़ात (पंक्ति में खड़े — الصافات) (आयत 19)

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37 अस-साफ़्फ़ात(الصافات), आयत १९

فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنْظُرُونَ 19 ١٩

वह तो बस एक झिड़की होगी। फिर क्या देखेंगे कि वे ताकने लगे है (१९)

तफ़सीर
वह तो मात्र सूर (नरसिंघा) में मारी जाने वाली एक फूँक (दूसरी फूँक) होगी, तो अचानक वे सभी लोग क़ियामत के दिन के भयावह दृृश्यों को देख रहे होंगे और इस बात की प्रतीक्षा कर रहे होंगे कि अल्लाह उनके साथ क्या करने वाला है।

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