सूरह अस-साफ़्फ़ात (पंक्ति में खड़े — الصافات) (आयत 25)

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37 अस-साफ़्फ़ात(الصافات), आयत २५

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ 25 ٢٥

"तुम्हें क्या हो गया, जो तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं कर रहे हो?" (२५)

तफ़सीर
उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा : तुम्हें क्या हो गया कि तुम एक-दूसरे की मदद नहीं करते, जिस तरह कि तुम दुनिया में एक-दूसरे की मदद किया करते थे और यह दावा करते थे कि तुम्हारी मूर्तियाँ तुम्हारी मदद करेंगी?!

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