सूरह अस-साफ़्फ़ात (पंक्ति में खड़े — الصافات) (आयत 36)

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37 अस-साफ़्फ़ात(الصافات), आयत ३६

وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَجْنُونٍ 36 ٣٦

और कहते थे, "क्या हम एक उन्मादी कवि के लिए अपने उपास्यों को छोड़ दें?" (३६)

तफ़सीर
और वे अपने कुफ़्र के लिए तर्क देते हुए कहते थे : क्या हम अपने देवताओं की पूजा एक दीवाने कवि के कहने पर छोड़ दें?! ऐसा कहने से उनका तात्पर्य अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम थे।

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