सूरह साद (ص) (आयत 63)

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38 साद(ص), आयत ६३

أَتَّخَذْنَاهُمْ سِخْرِيًّا أَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ الْأَبْصَارُ 63 ٦٣

क्या हमने यूँ ही उनका मज़ाक बनाया था, यह उनसे निगाहें चूक गई हैं?" (६३)

तफ़सीर
क्या हमारा उनका मज़ाक़ उड़ाना और ठट्ठा करना गलत था, चुनाँचे वे यातना के पात्र नहीं थे, या हमारा उनका परिहास करना सही था और वे जहन्नम में दाखिल हुए हैं, किंतु हमारी नज़र उन पर नहीं पड़ी?!

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