सूरह फुस्सिलत (विस्तार से बताई गई — فصلت) (आयत 34)

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41 फुस्सिलत(فصلت), आयत ३४

وَلَا تَسْتَوِي الْحَسَنَةُ وَلَا السَّيِّئَةُ ۚ ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ فَإِذَا الَّذِي بَيْنَكَ وَبَيْنَهُ عَدَاوَةٌ كَأَنَّهُ وَلِيٌّ حَمِيمٌ 34 ٣٤

भलाई और बुराई समान नहीं है। तुम (बुरे आचरण की बुराई को) अच्छे से अच्छे आचरण के द्वारा दूर करो। फिर क्या देखोगे कि वही व्यक्ति तुम्हारे और जिसके बीच वैर पड़ा हुआ था, जैसे वह कोई घनिष्ठ मित्र है (३४)

तफ़सीर
नेकियाँ और इबादतें करना, जिनसे अल्लाह प्रसन्न होता है, और गुनाह एवं अवज्ञा में लिप्त रहना, जिनसे अल्लाह क्रोधित होता होता, दोनों समान नहीं हैं। जो आपके साथ बुरा व्यवहार करे, उसके बुरे व्यवहार की बुराई उत्तम व्यवहार के द्वारा दूर करें। यदि आप ऐसा करते हैं, तो देखेंगे कि आपके और जिसके बीच पहले सख्त बैर था, वह आपका हार्दिक और घनिष्ट मित्र बन गया है।

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